नोट :
· यह सुनिश्चित करें कि आप शुध्द स्वच्द बीज स्टाक से इसका आरम्भ करें।
· तीन वर्ष पश्चात्, प्रतिविव्त बीज बिक्रेतासे नमी बीज खरीदने से यह बेहतर है।
· संकर पराग सिंचित फसलों जैसे कि मक्का अथवा सौरद्यम की बीजें उत्पादन करने की कोशिश न करें।
गेहूं, चावल एवं अन्य स्व-पराग सिंचित फसलों की अपने बीजों का उत्पादन कर पैसे की बचत करें। यह सुनिश्चित करें कि आप आवश्यक विशेषताओं सहित शुध्द-स्वच्छ बीजों को ही लें ; जो कि आपके विकावमान परिस्थितिों एवं आपकी जरूरतों के अनुकूल हों।
1- अपने बीज व्लाट को बिछा लें, जिसमें कि उत्पादित की जाने वाली किस्में अन्य किस्मों से अलग की जा सकें।
2- बीजने से पहले, बीज ड्रिल को सही ढंग से साफ कर लें। ड्रिलिंग मशीन के किसी भाग में कोई अन्य बीज का भाग नहीं रहना चाहिए।
3- फसल विकास के विभिन्न स्तरों अथवा चरणों पर बीज व्लाट का परिक्षण् करें।
हटा दें :
· अन्य उपज रहे पौध
· जंगली घासें
· अलग किस्म के पौधे (उत्पादित की जाने वाली किस्मों से अलग)
· बीमार पौधे
· मुख्य फसल की कटाई से पहले बीज व्लाट की कटाई एवं उसके दांव लें अर्थात थ्रेसिंग कर लें।
· बीज फसल की थ्रेसिंग से पहले थ्रेसर एवं थ्रेसिंग फर्श को समुचित साफ कर लें।
· थ्रेसिंग के बाद, ओसाने वाली टोकरी से बीज को साफ कर लें तथा छलनी से छोटे एवं कटे बीजों को हटा दें।
· बीज को सुरक्षित बीज - नमी स्तर तक सुखाएं। बीज को सही कंटेनर में संग्रहित करें।
· कीड़ों से अपने बीजों को बचाने हेतु अपने बीजों को सल्फॉस की 1-2 टिकिया 100 किलोग्राम बीजों को धूमित करती है।
· बोने से पहले, बीज को समुचित कवकनाशी से शोधित करें। उदाहरण के लिए : गेहूँ के बीजों को दूषित होने से बचाने के लिए 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम पर बीटावैक्स के साथ शोधित करें।
अनाज एवं बीज का संग्रह
अनाज का लगभग 70 प्रतिशत कृषकों द्वारा खाने खिलाने, बीज एवं बिक्री अथवा वस्तु विनिमय के लिए रख लिया जाता है। संग्रह के दौरान, अनाज में गुणवत्ताा एवं मात्रा दोनों में कमी आती है। यह हानियां, कीड़ा, कृतकों, चिड़ियों, फफूंदी, गर्मी एवं बिखरने के कारण होती है। यहां कुछ साधारण विधियां है जिनके द्वारा खेती करने वाली महिलाएं अपने अजान को सुरक्षित संगह कर सकती हैं। (सुरक्षित अनाज संरचनाओं को देखें)
संग्रह से पहले
अपने अनाज को सुखा लें और साफ कर लें। अनाज सुखाने में लगने वाला समय मौसम पर निर्भर करता है। अनाज में नमी का पता लगाने हेतु इसे दांत से काट कर देखें अगर आप इसे दांत से काटते हैं और यह टूट जाता है तो यह संग्रह करने के लिए तैयार है। अगर संभव हो तो अनाज को सीमेंट फ्लोर अथवा सख्त, सममतल, दरार से मुक्त फर्श पर ही सुखांए। अन्यथा सुखाने के लिए प्लास्टिक शीट अथवा तारपोलीन को इस्तेमाल करें।
· एक समान सुखाने के लिए उसे बीच-बीच में हाथ से फैलाते रहें अथवा उलट-फेर करते रहें।
· धूल वाली हवा से बचाने के लिए अनाज को ढक लें।
· संग्रह संरचना को साफ करें तथा असंक्रमित करें। सभी धूल एवं कूड़ा-कर्कट उसमें से साफ कर दें।
· संरचना के खुले स्थानों पर जाली अथवा तार की जाली लगा दें जिसमें कि चिड़ियों की आवा-जाही न हो।
संग्रह
· हमेशा साफ, सूखे, साबुत अनाज ही संग्रहित करें जो कि गंध से मुक्त हों।
· अनाज को बड़े खुले भंडार में अथवा, खराब बैग में कभी भी संग्रहित न करें।
· अजाज हमेशा गीले स्थान से दूर संग्रहित करें।
· अनाज की बोरियों को दीवार से न सटाएं। अनाज की बोरियों को भू-तल से ऊपर एक ऊपर एक कर रखें। इससे दीवारों एवं भू-तल से आने वाली नमी प्रवेश नहीं करती है।
· नए अनाज में पुराना अनाज न मिलाएं। इसके साथ ही पुरानी फसलों से अनाज के निकट नमी से फसल से अनाज संग्रहित न करें।
· अपने अनाज में नीम की सूखी पत्तिायों को मिलाएं अथवा कोई अन्य कीटनाशी तत्व मिलाएं।
संग्रह पश्चात~
· कीड़ों, कवकों एवं अन्य कीटों हेतु अनाज का नियमित निरीक्षण करते रहें। इस हेतु समुचित निदात्मक मापदण्ड लेते रहें। (इस पुस्तक के अन्य अनुभाग देखें)
· समय-समय पर अनाज को धूप में फैलाते रहें। कीटनाशक का छिड़काव तभी करें अगर कीट की संख्या अधिक हो।
· नमी हेतु अनाज की नियमित जांच करते रहें तथा अगर आवश्यक हो तो पुन: सुखाएं।
· संग्रह संरचनाओं एवं आस-पास का क्षेत्र साफ रखें।
बीज संग्रह
कटाई से लेकर फसल की अगली बुआई तक साधारणत: 7-10 माह का अंतराल होता है। फसल के आधार पर एक मौसम में उत्पादित बीजें अन्य मौसम में बुआई हेतु अवश्य बचा ली जाती हैं। बुआई के समय बीज की गुणवत्ताा उस पर निर्भर करती है कि बीज को किस तरह संगह किया गया है तथा किस तरह रखा गया है।
अनाज के बीजों के लिए विशेष देखभाल की जरूरत है :
· स्टोरेज से पहले खाद्यान्न बीजों की तुलना में अनाज के बीज पूरी तरह सुखाए जाने चाहिएं तथा उन्हे साफ करना चाहिए।
· स्टोरेज के दौरान, रसायनों का इस्तेमाल करें जैसे कि सल्फॉस (अल्यूमिनियम फॉसफाइड) इसका उपयोग उपभोग करने वाले अनाजों के लिए कदापि न करें। सल्फॉस का उपयोग खाद्यान्न हेतु बर्जित हैं। सल्फॉस की एक टिकिया 100 किलोग्राम बीज का शोधित करती है। टिकिया को बीज कंटेनर के सबसे नीचे रखें। इससे ऐसी गैस निकलती है जो कीड़ों अथवा कीटों को आने नहीं देती। सल्फॉस से निकली गैस काफी हानिकारक होती है। डपचार उपरांत बीजों को सूरज की रोशनी में फैला दें तथा गैस निकलने दें, इसके पश्चात् बीजों को पानी से धो लें और धूप में सुखा लें।
· ब्ीजों को हिलाएं नहीं परन्तु खराब होने से बचाने के लिए इसे नियमित देखते रहें। अगर कोई बीमारी अथवा कीट है तो उसे साफ करें और असंक्रमित करें।
· ब्ीज संग्रह अथवा बिन को एयरटाइट रखें अर्थात उसमें हवा बिल्कुल नहीं प्रवेश करनी चाहिए।
· बीजें छोटी मात्रा में स्टोर करनी चाहिएं, जैसे कि सब्जी के बीज, पॉलीथीन बैग के अन्दर कपड़े के बैग में रखें। बैग को करस कर बांध लें।
बीज कहां स्टोर करें
· बीजों को, अनाज फसलों से अलग स्टोर करें, बीजों को पत्थर, र्इंट अथवा सीमेंट के कक्ष अथवा बिन में रखें।
· बोने से पहल, अंकुरण का परिरक्षण करें, अपनी मर्जी से 100 बीजें लें, उन्हे गीले रेत में रखें। 100 में से कम से कम 85 अंकुरित होने चाहिए। अगर अंकुरण की संख्या इससे कम है तो और बीजें अंकुरित करें।
नोट :
स्टोरेज में बीजों का सुधार नहीं होता है। अत: अगर आप खराब बीज रखेंगे तो आप को खराब बीज ही मिलेंगी, चाहे आप उसकी कितनी ही देख-रेख करें।
गुणवत्ताा बीज
अच्छी क्वालिटी की बीजें :-
o सही ढंग से अंकुरित करें।
o वह धूल एवं अन्य पौध के बीजों से मुक्त होना चाहिए।
o बीमारी से मुक्त होना चाहिए।
चेतावनी
उस अनाज का सेवन न करें जो रसायनो जैसे कि सल्फॉस (अल्यूमिनियम फॉसफाइड) से शोधित किया गया हो।
नोट :
· कुछ फसलों के बीज बिना छिलका हटाए बेहतर स्टोर किए जा सकते हैं जैसे कि मक्का, सोरधम, बाजरा, मूंगफली, ग्वारफली एवं सूरजमूखी। बीजने से पहले इसके छिलके निकाल दें।
· अपनी बीजें, सूखी, ठण्डी, स्वच्छ एवं कीट से सुरक्षित रखें। अपने बीज स्टाक को नमी एवं कीट से बचाने हेतु नियमित देखते रहें।
स्टोरेज विधि
· जब भी बीज का खेत तैयार हो जाए तो उसकी कटाई अलग से करें। स्वस्थ एकरूप पौधों से ही बीजें निकालें।
· बीजों के आवरण को क्षति होने से बचाने के लिए उसकी दवाई आराम से करें। टूटे, क्षतिग्रस्त अथवा बीमार बीज, जंगली घासों की बीजें एवं अन्य फसलों की बीजें निकाल दें।
· स्वच्छ शीट अथवा पक्के फर्श पर जो कि पत्थर अथवा र्इंटों से बना हो उस पर पूरे बीजों को बिछा कर सुखाएं।
· नमी देखने हेतु अनाज को मुँह से काट कर देखें। बीजें अगर काफी सख्त हैं तो वह सूख चुकी हैं तथा स्टोरेज के लिए तैयार हैं।
· स्वच्छ, सूखे बीजों को साफ बैग में रखें - गनी बैग, हेसियन बैग अथवा कपड़े का बैग - अथवा प्लास्टिक कंटेनर, मैटल बिन्स, मिट्टी के बर्तन अथवा मिट्टी लेप बांस बिन्स।
· कंटेनर के नीचे रेत बिछाएं। यह बीज को सूखा रखने में मदद करेगी।
· बैग अथवा कंटेनर में नीम की सूखी पत्तिायां रखें। नीम कीड़ों से बीज को बचाएंगी, विशेषकर दालों में यह काफी मददगार है क्योंकि दालों को सबसे पहले कीड़े लगते हैं।
· अलसी के तेल के साथ मिश्रित मिट्टी के लेप के साथ कंटेनर के लीड को बंद कर दें।
बीज स्टोर का रखरखाव
· प्रत्येक 3 से 4 माह में बीज बैग को धूप में सूखाएं।
· नियमित बीज का निरीक्षण करते रहें।
· अगर किसी भी फसल की बीज में कीड़े लगने का थोड़ा सा भी शक हो तो उसे स्टोर से हटा दें।
· संक्रमिव बीज को साफ करें और सुखा लें तथा इसके कंटेनर की सफाई भी सही ढंग से करें। कम से कम 2-3 सप्ताह इस बीज को अलग स्थान पर स्टोर करें।
· कीड़ों के पुन: उपस्थिति को देखें। इसे स्टोर रूम में तभी रखें जब वह कीड़ों से पूर्णत: मुक्त हो।
· बीज स्टोर वर्ष में दो बार खाली करें और धूमित करें तथा उसे गाय के गोबर से तथा सूखी घास से बंद करें तथा सुखा रखें और कीड़ों से मुक्त रखें।
· वर्षा ऋतु से पहले स्टोर रूम का निरीक्षण करें।
सुरक्षित अनाज संग्रह सरंचना
कृषक परिवार अपने छोटे-छोटे खेतों में अधिक से अधिक उपज अर्थात् पैदावार करने के लिए काफी प्रयत्न करते हैं। यह बहुत ही महंगा व्यवसाय है, क्योंकि इसमें 15 प्रतिशत जो भी वे खाने, खिलाने, बीज एवं बिक्री के लिए रखते हैं वह स्टोरेज में खराब हो जाता है अथवा हानि होती है। यह मानकर चलिए कि कुल उत्पादन में मात्र 70 प्रतिशत ही शेष उनके पास बचता है अर्थात 30 प्रतिशत की उन्हे हानि होती है। परन्तु इस हानि को बचाने हेतु कुछ किया जा सकता है। अनाज फसलों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने हेतु निम्न अनाज संग्रह संरचनाएं हैं।
अनाज बिन (घानी)
परंपरागत अनाज घानी : कृषक परिवार मूलत: स्थानीय आकार के विभिन्न अनाज घानियां इस्तेमाल करती हैं, जो स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों जैसे कि बांस, मिट्टी, सूखी घास, जूट बैग, ईंट एवं लकड़ी से बने होते हैं। परंपरागत अनाज घानियों को दो प्रमुख श्रेणियों में समूहित किया गया है।
· एक तो वह जो कि दागे हुए अथवा बिना दागी गयी मिट्टी, स्टोन स्लैब अथवा ईंटों से बने होते हैं तथा अनाज एवं फलीदार पौधों को स्टोर करने हेतु इस्तेमाल किए जाते हैं। यह घानियां हवा को घुसने नहीं देती हैं परन्तु यह कीटों एवं नमी से नहीं बचाती हैं।
· दूसरा वह है जो बांस, लकड़ी, सूखी घास एवं अन्य सूखे पौध सामग्रियों से निर्मित है जो कि धान एवं मक्का का संग्रहित करने हेतु इस्तेमाल किया जाता है। यह घानियां सुखाने के लिए हवा आगमन सही रखती हैं परन्तु यह कीड़ों, कीटों, आग, घरेलू पशुओं के लिए खुली रहती हैं।
उन्नत स्टोरेज अथवा संग्रह संरचनाएं
र्इंट अथवा स्लैब के दो सतह के बीच पॉलीथीन शीट रखने द्वारा, पत्थर के स्लैब, र्इंट एवं दागी गई मिट्टी के बीज को नमी से मुक्त रखती हैं तथा इसमें उंचे प्लैटफार्म पर घानी बनाई जाती है। ऐसी संरचनाएं प्रभावी धूमीकरण के लिए काफी सुरक्षित रहती हैं।
समुदाय एवं शहरी घरों के इस्तेमाल हेतु घानी
बीजों अथवा घानियों की कच्ची अन्य डिजाइनें भी उपलब्ध हैं। बड़ी घानियां कभी घरों अथवा सप्पूर्ण समुदायों द्वारा इस्तेमाल की जाती हैं। धातु अथवा प्लास्टिक द्वारा निर्मित छोटी घानियां शहरी क्षेत्रों में घरों हेतु योग्य हैं। इन्हे आप व्यावसायिक विनिर्माणकों से खरीदा जा सकता है अथवा स्थानीय रूप से बनाया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए निम्न पतों पर सम्पर्क करें :-
Ø केन्द्रीय भवन अनुसंधान संस्थान - रूड़की - ब्रिक मेसेनरी बिन
Ø संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केन्द्र - रूड़की - प्रबलित कंक्रीट बिन
Ø मैसर्स पेस्ट कंट्रोल इण्डिया प्रा.लि. नई दिल्ली - प्रबलित कंक्रीट बिन
Ø मैेसर्स पॉलीथीनीन फिल्म इण्डस्ट्रीज प्रा. लि. मद्रास - उच्च घनत्व के पॉलीथीन बिन
Ø उत्तर प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय - पतेनगर - पतनगर कतला
Ø वन अनसंधान संस्थान - देहरादून - ग्लास सिलोम
Ø अंतरिक्ष अनसंधान संस्थान - त्रिवेन्द्रम - ग्लास फाइबर बिन
Ø कीट-विज्ञान विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान - नई दिल्ली-12
चित्र इंडोर बिन
Ø सीमेंट की ऊपरी सतह
Ø लोडिंग का द्वार
Ø प्लास्टिक पी.बी.सी. लाइनिंग (कीटों, कीड़ों की संख्या को कम करने हेतु एयरटाइट (हवारहित) बिन
Ø खाली करने हेतु द्वारा
Ø बिन के ऊपर तक भरा अनाज
Ø ईंटों के ऊपर सीमेंट प्लास्टर (बिन पर चड़ने से चूहों को दूर रखना)
कीटनाशकों की सूची एवं होने वाली क्षति
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एन्जॉमॉयस ग्रेन मोथ (अनाज कीड़ा)
सिटोट्रोगा सेरेलेला
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डिमक अर्थात लारवा अनाज में छेद करके उसमें घुस जाता है तथा उसे खाता रहता है। अनाज से अजीब सी दुर्गंध आती है तथा जब संक्रमण ज्यादा हो जाता है तो अनाज खराब हो जाता है।
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राइस मोथ (चावल कीड़ा)
कॉरसइरा सेफालोनिका
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जब संक्रमण अधिक हो, अथवा ग्रसन अधिक हो, तब अनाज का संपूर्ण जाल में फंस सकता है अथवा प्रभावित हो सकता है।
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भारतीय खाद्य कीड़ा
प्लॉडिया इंटरपकटेलिया
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अनाज सक्रिय रेंगने वाले कैटरपिल्लर (संडी) द्वारा खराब होते हैं, जो अपने रेशमी धागों द्वारा संपूर्ण अनाज के भंडार को खराब कर देते हैं। कैटपिल्लर संग्रहित खाद्य पदार्थ में सुरंग अथवा छेद करके घुसते हैं।
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बादाम कीड़ा
केडरा काउशेला
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कैटपिल्लर संग्रहित खाद्य पदार्थ में सुरंग अथवा छेद करके घुसते हैं।
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खपरा कीट
ट्रोगोडेरमा ग्रेनेरियम
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सुंडियां अनाज को खाती हैं, अपने भू्रण से इसे खत्म करती हैं। ग्रसन अधिक होने पर अनाज धूल के रूप में ही रह जाता हैं।
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चावल घुन
सीटोफीलस ओराइजे
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लारवा एवं अन्य बड़े कीड़े अनजा को अंदर ही अंदर खाते रहते हैं।
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भूरा-लाल घुन
ट्राइबोलियम केस्टानियम
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यह आटा एवं आटा उत्पादों को काफी हानि पहँचाते हैं। अत्यधिक ग्रसन होने पर आटा सलैटी रंग का हो जाता है तथा भुकड़ी पड़ जाती है।
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लेसर ग्रेन बोरट
रीजो पर्था डोमीनीका
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बड़ी सुंडियां अनाज को काफी हानि पहुँचाती हैं, यह सुंडियां अनाज को कमी छेदकर उन्हें खोखला कर देती हैं।
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अनाज सुंडी (दाल सुंडी)
कैलोसोबशस ड्रिनेनसिस
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छोटे लारवे अनाज में छेद करके उसमें घुस जाते हैं तथा अनाज के अंदर ही अपनी संपूर्ण जीवन चक्र पूरा करते हैं। दालें मानव उपभोग के लिए भोग्य नहीं रहती हैं।
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कांटेदार दांतो वाले अनाज सुंडी
ओरीजेफिलस सुरीनेमनेसिस
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अनाज की सतह को कुरेदता है तथा उसमें छेद बनाता है।
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लम्बे सिर वाले आटा सुंडी
लेदेटिकस अरिजे
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टूटे अनाज एवं आटा पर पोषित रहता है।
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पतले अनाज सुंडी
क्राइटोलेसटेस मिनरस
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टूटे अनाज पर पोषित रहता है।
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उन्नत कृतंकमुक्त अनाज भंडार
चूहों को कैसे पकड़ें :-
· चूँ-चूँ एवं खुरचने की आवाजे आने पर
· गंध
· चूहे क ामल एवं मूत्र
· सुरंगें
· क्षति, जैसे कि कटे हुए बैग, खराब अनाज
· दांतों से कटी खिड़कियां एवं दरवाजे
· धूल वाले फर्श पर पांव एवं पूंछ का निशान
· ग्री सी चिन्ह
बहुसर्जक कीट अर्थात पेस्ट
चूहों की जनसंख्या वृध्दि के प्रमुख कारक :-
· चूहों की पूर्ण जीवन अवधि 12 से 18 माह की होती है।
· चूहे पूरे वर्ष निरंतर प्रजनन करते रहते हैं।
· तारूण्य पश्चात् पहला मासिक 48-96 घंटे का होता है।
· चूहे 6 से 11 सप्ताह में ही प्रजनन के लिए तैयार हो जाते हैं।
· एक मादा चुहिया एक बार में 5 से 12 बच्चों को पैदा करती है।
· एक मादा वर्ष में 4-6 बार प्रजनन करती है।
चूहे एक तरफ से महंगे, अस्वास्थ्यकर जन्तु हैं, जो कि हर जगह पाए जाते हैं। इनमें बीमारी फैलती है, ये फसलें खराब करते हैं। संग्रहित खाद्य पदार्थों को क्षति पहुंचाते हैं, घर की संपत्तिायों को हानि पहँचाते हैं तथा वन एवं फल वाले पौधों को भी क्षति पहुँचाते हैं। चूहे प्रति वर्ष 20 मिलियन टन से भी अधिक खेत की फसलों को नुकसान पहँचाते हैं तथा 33 मिलियन टन से अधिक भंडार में अनाज को हानि पहँचाते हैं। भारत में अकेले 11 मिलियन टन फसलें चूहों द्वारा क्षतिग्रस्त होती हैं। यह उनके मूत्र, मल, बाल एवं अन्य शरीरिक श्राव से होते हैं।
नियन्त्रण :
चूहों को सम्पूर्णतया भगाने की कोई विधि नहीं है। चूहों को तथापि निदान एवं उन्हे मारने के कार्यक्रम द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है।
चूहों से निदान
· खाद्य पदार्थों को रैट-प्रूफ कंटेनर में रखें।
· शेष बचे खाद्य पदार्थों को कसकर बंद किए गए बिन में रखें।
· अनाज आगारों के निकट कूड़ा-कर्कट, लकड़ी अथवा र्इंटें इकट्ठे न होने दें।
चूहों को मारना
वर्षा ऋतु में जब खेत पानी से भर जाते हैं तब चूहे भोजन एवं अपने निवास हेतु रिहायशी क्षेत्रों के निकट इकट्ठे हो जाते हैं। यही वह मौसम है जब वे प्रजनन भी करते हैं। अत: इस ऋतु में ही इन्हे मारा जा सकता है। अत: वर्षा ऋतु चूहों के विनाश हेतु काफी उत्ताम है।
मैकेनिकल विधियां
जाल
खेत के चूहे : बांस के धनुष एवं तीर के जाल, पौट जाल एवं ब्रेक-ब्रेक जाल खेत के चूहों को पकड़ने में काफी मददगाार होते हैं। ब्रेक-ब्रेक जाल अपने नाम अनरूप काफी खतरनाक होते हैं।
नोट: जाल में फंसे चूहों को उनके जाल के साथ ही पानी में डुबो देना चाहिए।
घरेलू चूहे : चूहों को पकड़ना काफी पुरानी प्रथा है। स्टोरेज में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा हेतु स्प्रिंग ट्रैप एवं मल्टीपल टै्रप आम टै्रप हैं।
नोट :
मृत चूहों को गाड़ देना चाहिए। मृत चूहे जो गाड़े नहीं जाते हैं वह स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होते हैं तथा पर्यावरण प्रदूषित करते हैं।
बिलंब
एक्सन बेट्स : जिंक फासफाइड चूहों को तुरन्त खत्म कर देती है। वारफेरिन एवं अन्य जहर 6-7 दिनों के बाद मारते हैं। चूहे काफी समझदार होते हैं। जब कुछ चूहे जिंक फासफाइड से मर जाते हैं तब अन्य चूहे इस बेट को नहीं खाते हैं। अत: प्रभावी नियन्त्रण हेतु वार फरेन अथवा अन्य विलब कार्यात्मक जहर का प्रयोग करें।
चेतावनी
पौल्ट्री एवं बच्चों से बैट को दूर रखें। बैट खाने के बाद, चूहे पानी की तलाश करते है। अत: अपने सभी पेय जल को सुरक्षित रखे।
भारत में चूहों द्वारा फसलों को पहँचाई जाने वाली क्षति
ज्वार 5-12 प्रतिशत
गेहूँ 3 प्रतिशत
मूंगफली 2-7 प्रतिशत
नारियल 6-28 प्रतिशत
सोरधम 17 प्रतिशत
धान 6-17 प्रतिशत
चना 1-4 पतिशत
गन्ना 5 प्रतिशत
कोकोआ 1-5 प्रतिशत
अनाज भंडार क्षेत्रों में प्रवेश निषेध करें
· ग्लास, सीमेंट, प्लास्टर में टुकड़ों के साथ छेद बनाएं।
· यह सुनिश्चित करें कि दरवाजे सहीं ढंग से बंद हों।
· बिना सीढ़ी के 75 सैं.मी. ऊॅंचा एक ठोस प्लेटफार्म का निर्माण करें, जिस पर आप अपना अनाज संग्रहित करें।
· दरवाजे के नीचे मेटल शीट लगाएं।
पानी भरना एवं धूम्रपान
खेतों में चूहों द्वारा बनाए गए छेद में अत्यधिक पानी डालें एवं धुऑं छोड़े। अच्छे परिणाम के लिए यह कार्य पूरे समुदाय के साथ मिलकर समन्वित रूप में जितना सम्भव हो उतना सभी चूहे के छेदों को लक्ष्य बनाकर करें।
कलंबिंग
कोने में रह रहे चूहों को लम्बी एवं भारी डंडियों के साथ कलम्ब (घेरे) करें।
रसायन विधियाँ
जिनसे चूहो को मारा जाता है उसे रसायन कहते हैं। यह एकल डोज़ अथवा बहुडोज़ जहरों के हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं जिंक फास्फाइड, बेरियम कार्बोनेट, वार फैरेन, रोडा फैरेन आदि। यह कम्पाउंड बहुत अधिक जहरील होते हैं तथा चूहों का सम्पूर्णतया विनाश कर देते हैं।
बैट की किस्में
· इस्तेमाल हेतु तैयार - जब बैट इस्तेमाल के लिए तैयार हों तो उसे चूहों को प्रत्यक्ष दिया जा सकता है।
· ड्राय कन्संट्रेट - 450 ग्राम गेहूं का आटा, 10 ग्राम खाद्य तेल एवं 15 ग्राम चीनी एवं गुड़ सहित 25 ग्राम बैअ में मिला दें। इसमें पानी न मिलाएं।
· पानी में घुलने वाला बैट - यह तब कारगर होता है जब चूहों का संक्रमण एवं तापमान अधिक हो। इसमें बैट के एक भाग को पानी के 20 भाग में मिला दें तथा एक बड़े खुले कंटेनर में रख दें ताकि चूहे इसे पी सकें।
बैट कैसे इस्तेमाल करें
किसी भी जहर का इस्तेमाल करने से पहले चूहों को बैट रहित खाद्य पदार्थ कुछ दिनों तक दें। खाद्य पदार्थों को बड़े कंटेनर में रखें तथा इसे ऐसे स्थान पर रखें जहां चूहों का आना जाना अधिक हो । यह चूहों को एक विशेष भोजन खाने हेतु उनमें एक आयत का संचार करेगा इसे प्रीबैटिंग कहते हैं। कुछ समय बाद उस खाने में बैट मिला दें।
बैट चूहे के छेदों में भी डालें जा सकते हैं। इसे टार्पेडो बैटिंग कहते हैं।
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