भीमताल जलागम प्रबन्ध परियोजनान्तर्गत विकासखण्ड ओखलकाण्डा में सुदूर स्थित ग्राम सुरंग सूक्ष्म जलागम क्षेत्र सुरगड़ानाला में स्थित है। भीमताल परियोजना द्वारा इस सूक्ष्म जलागम क्षेत्र में वनीकरण, चारागाह, औद्यानिकी, भूमि संरक्षण, कृषि, पषुपालन व लघुसिंचाई सम्बन्धी कार्य स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी/सहयोग से सराहनीय ढंग से किया जा रहा है एवं ग्रामवासियों को पर्याप्त मात्रा में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
परियोजना द्वारा जलापूर्ति मद से जलविहीन स्थान में पेयजल एवं सिंचाई योजनाएं बनवाई गई हैं जिनमें से एक योजना का वर्णन यहां किया जा रहा है।
गांव में उपलब्ध 13-14 वर्ष पुरानी लगभग 1200 मीटर जीर्णषीर्ण व मृत जी. आई. पाईप लाईन को सक्षम अधिकारी की अनुमति प्राप्त कर ग्रामवासियों द्वारा श्रमदान से उखाड़कर गांव में ही उपलब्ध अन्य जलश्रोत से गांव तक पानी लाने हेतु उक्त पाईप लाईन बिछाई गई। परिणाम स्वरूप गांव में उपलब्ध संसाधनों व ग्रामवासियों के श्रमदान से जलविहीन बिन्दु तक 29-11-94 को पानी पहुंच गया। इतना कार्य ग्राम संगठन/ग्रामवासियों द्वारा करने के उपरान्त भीमताल जलागम परियोजना द्वारा पेयजल डिग्गी, सिंचाई हौज व पेयजल वितरण हेतु 15 मि.मी. जी. आई. पाईप बिछाने का कार्य किया गया है। योजना का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि सर्वप्रथम पानी पेयजल डिग्गी में एकत्र होता है तथा ओवरफलो का पानी सिंचाई हौज में एकत्र होता है। इस प्रकार पेयजल व सिंचाई की संविधा साथ-साथ उपलब्ध है। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के पष्चात् लगभग 15 परिवार आलू, प्याज, फरासबीन, अदरक व अन्य फसलें व सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान सम में पेयजल डिग्गी से भी परिवारों के घरोें में पेयजल संयोजन के फलस्वरूप पर्याप्त मात्रा में पेयजल, स्नानघर व षौचालय हेतु पानी उपलब्ध है। सिंचाई हौज भरा मिलता है जिससे कृषक बारी-बारी से तकरीबन 6-7 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई करते हैं। इस योजना से इस जगह विषेष कर चतुर्मुखी विकास के साथ-साथ प्रत्येक घर में षौचालय निर्माण से पर्यावरण में भी सुधार हुआ है। अब औसतन प्रत्येक परिवार का नकदी फसलों से प्रतिवर्ष लगभग 5 हजार रूपयों का आर्थिक लाभ हो रहा है।
भविष्य में योजना के रखरखाव हेतु प्रत्येक माह प्रति परिवार रू. 5.00 जमा होता है जो कि सिंचाई एवं पेयजल समूह के अध्यक्ष एवं सचिव के सयुंक्त खाते में जमा है अब हमें भविष्यत में योजना के रखरखाव हेतु किसी विभाग पर निर्भर रहने की आवष्यकता नहीं है। इस प्रकार परियोजना को विकास की दृष्टि से वरदान कहा जाए ता अतिष्योक्ति न होगी।
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